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यारों सब दुआ करो…

अरसा हो गया अनुभव सिन्हा से बात किए हुए। हमारी आखिरी बातचीत तब हुई थी जब उन्होंने मुझे एक संभावित फिल्म निर्माता समझ कर फोन किया था और उन्हें लगा था कि मैं दिल्ली से बहुत सारा पैसा लेकर मुंबई पहुंचा हूं फिल्म बनाने। उन दिनों मैंने अपनी पहली फीचर फिल्म का काम बस शुरू ही किया था। अपनी फिल्म कैश के नाकाम रहने के बाद तब अनुभव सिन्हा काम तलाश रहे थे।

सिनेमांजलि
पंकज शुक्ल

पूरा देश जहां एक तरफ क्रिकेट वर्ल्ड कप के खुमार में डूबा हुआ है, सुनते हैं कि शाहरुख खान ने अपनी लंबे समय से बन रही और जल्द रिलीज होने जा रही फिल्म रा वन का पहला प्रोमो रिलीज कर दिया है। और, ये संयोग ही है कि ठीक इसी समय कार्टून नेटवर्क ने अपना न्यू जेनरेशन सर्वे भी इस साल के लिए रिलीज किया। पश्चिमी देशों में फिल्म और कार्यक्रम निर्माता अपने हर प्रोजेक्ट से पहले इस तरह के सर्वे कराते हैं और संभवत: कार्टून नेटवर्क ने अपनी भावी कार्यक्रम योजनाओं के मद्देनजर ऐसा किया। सर्वे के तमाम दिलचस्प नतीजों में एक नतीजा ये भी सामने आया कि भारतीय अभिनेताओं की बात चलने पर बच्चों के बीच शाहरुख खान अब भी सबसे ज्यादा पसंद किए जाते हैं। सर्वे में शामिल बच्चों में से 28 फीसदी ने शाहरुख को अपनी पहली पसंद बताया। सलमान खान उनके बाद नंबर दो पर और ऋतिक रोशन नंबर तीन पर रहे। हालिया प्रसारित हुए रिएल्टी शो जोर का झटका के आंकड़ों के लिहाज से देखा जाए तो शाहरुख का तिलिस्म छोटे परदे पर कम होता जा रहा है, लेकिन इसकी बड़ी वजह उनका इन दिनों अपने सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान ऐसी भाषा का प्रयोग करना माना जाता रहा है, जो भारतीय परिवार एक साथ बैठकर सुन और देख नहीं सकते। लेकिन, भले बड़ों के लिए ये भाषा अभद्र रहे, टीन एजर्स इसे ट्रेंडी मानते हैं। रा वन शाहरुख का ड्रीम प्रोजेक्ट है और इस पर वह पानी की तरह पैसा बहा भी रहे हैं। लेकिन, इस फिल्म मेरी दिलचस्पी सिर्फ इसलिए ही नहीं है कि देखें तो भला कि इसी कहानी पर पहले ही बन चुकी रोबोट से ये फिल्म कितना अलग रहती है बल्कि मैं इसका इंतजार इसके निर्देशक अनुभव सिन्हा की वजह से कर रहा हूं।

अरसा हो गया अनुभव सिन्हा से बात किए हुए। हमारी आखिरी बातचीत तब हुई थी जब उन्होंने मुझे एक संभावित फिल्म निर्माता समझ कर फोन किया था और उन्हें लगा था कि मैं दिल्ली से बहुत सारा पैसा लेकर मुंबई पहुंचा हूं फिल्म बनाने। उन दिनों मैंने अपनी पहली फीचर फिल्म का काम बस शुरू ही किया था। अपनी फिल्म कैश के नाकाम रहने के बाद तब अनुभव सिन्हा काम तलाश रहे थे। मैंने उन्हें समझाया कि मैं इस प्रोजेक्ट से बस एक निर्देशक की हैसियत से ही जुड़ा हूं और जिस किसी ने भी मेरे फिल्म निर्माता होने की सूचना उन तक पहुंचाई है, उसके पास गलत जानकारी रही है। उसके बाद उनका दोबारा फोन नहीं आया, और मैं भी जिंदगी के दूसरे झंझावातों से जूझने में लगा रहा। लेकिन, मुझे वे दिन अब भी याद हैं जब अनुभव सिन्हा मुझे अक्सर फोन किया करते थे और फोन उठाते ही पूछते थे कि क्या वह मुझसे बात कर सकते हैं? और क्या बातचीत के लिए वह सही समय है। ये वो वक्त था जब वो म्यूजिक वीडियो डायरेक्टर से फिल्म डायरेक्टर बनने की तरह पहली छलांग लगा चुके थे। आपको शायद मालूम ही होगा कि सोनू निगम के शुरुआती अलबमों के ज्यादातर वीडियो अनुभव सिन्हा ने ही निर्देशित किए हैं और ये अनुभव सिन्हा ही थे जिन्होंने शायद पहली बार अपने म्यूजिक वीडियो में बिपाशा बसु को ग्लैमर की दुनिया का पहला बड़ा मौका दिया था। अनुभव सिन्हा की दूसरी फिल्म आपको पहले भी कहीं देखा है, बुरी तरह फ्लॉप रही। ये फिल्म मैंने दिल्ली के कनॉट प्लेस के एक थिएटर में देखी थी। फिल्म देखने के बाद मैंने अनुभव को फोन किया और बताया कि फिल्म के संपादन की शैली मुझे काफी पसंद आई और ये भी कि उनका कहानी कहने का अंदाज बजाय एक रूमानी फिल्म के किसी थ्रिलर के लिए ज्यादा मुफीद है।

अनुभव ने उसके बाद कभी कोई रूमानी फिल्म नहीं बनाई। उनकी अगली दो फिल्में थी दस और कैश। इन फिल्मों के बाद वह बतौर निर्देशक बड़े परदे पर वापसी के लिए लंबा इंतजार कर चुके हैं। सिनेमा में संघर्ष के दिन ज्यादातर तकनीशियनों को जिंदगी की हकीकत से रूबरू कराते हैं। मुझे उम्मीद है कि ऐसा ही कुछ सबक अनुभव ने भी अपने इस संघर्ष से सीखा होगा और वह अब भी रा वन की टीम के कप्तान की हैसियत से अपने एक बड़े सपने को परदे पर उतारने में तल्लीन होंगे। अनुभव में फिल्म बनाने के सबसे अहम पहलू शॉट डिवीजन के दौरान नए नए प्रयोग करने की अद्भुत क्षमता है। वह एक मंजे हुए तकनीशियन और एक उम्दा निर्देशक हैं हालांकि यही बात उनकी निजी शख्सीयत के बारे में मैं दावे के साथ नहीं कह सकता। ग्लैमर की दुनिया की चकाचौंध के अलावा इस जिंदगी का एक दूसरा पहलू भी है, जो उतना आकर्षक अक्सर नहीं दिखता। अनुभव ने मुंबई आकर जिन दोस्तों का गुट बनाया था, वह अब बिखर चुका है। उन पर फ्लॉप निर्देशक का तमगा चस्पा होने के बाद वे सारे दोस्त उनसे कन्नी काटकर निकल चुके हैं। शायद अनुभव और शाहरुख दोनों का दिल्ली कनेक्शन उन्हें रा वन के करीब लाया। इस फिल्म की शूटिंग के दौरान अक्सर हमें तरह तरह के किस्से सुनने को मिलते रहे हैं कि कैसे हर शॉट के बाद अनुभव ओके कहने से पहले शाहरुख का मुंह ताकते हैं। लेकिन मेरा अपना मानना है कि अगर ऐसा होता भी रहा है तो शाहरुख का बतौर निर्माता इसका हक बनता है। रा वन की मेकिंग से जुड़े मित्र बताते रहे हैं कि ये फिल्म हिंदी सिनेमा निर्माण में एक नया अध्याय जोड़ सकती है। ये फिल्म दुनिया की बेहतरीन फिल्मों का मुकाबला करने में सक्षम है। हालांकि, मैंने रा वन का फर्स्ट लुक प्रोमो अभी तक नहीं देखा है, फिर भी मुझे यकीन है शाहरुख जैसे सुपर स्टार और अनुभव जैसे काबिल हुनरमंद ने मिलकर जरूर एक ऐसी फिल्म बनाई होगी जो अनुभव के शुभचिंतकों और शाहरुख के प्रशंसकों को समान रूप से पसंद आएगी।